जिंदगी खेलती भी उसी के साथ है,
जो खिलाड़ी बेहतरीन होता है,
दर्द सबके एक से हैं, मगर हौसले सबके
अलग-अलग हैं,
कोई हताश होकर बिखर जाता है,
तो कोई संघर्ष करके निखर जाता है
खोल दे पंख मेरे कहता है परिंदा,
अभी और उड़ान बाकी है,
जमीन नहीं है मंजिल मेरी,
अभी पूरा आसमान बाकी है।
कई जीत बाकी है कई हार बाकी है,
अभी तो जिंदगी का सार बाकी है।
यहां से चले हैं नहीं मंजिल के लिए,
यह तो एक पन्ना था अभी तो पूरी किताब बाकी है।
जो अपने कदमों की
काबिलियत पर विश्वास रखते हैं
वह ही अक्सर मंजिल पर पहुंचते है
जितना बड़ा संघर्ष होगा,
जीत उतनी ही शानदार होगी।
हर छोटा बदलाव बड़ी
कामयाबी का हिस्सा होता है।
जितना बड़ा सपना होगा
उतनी बड़ी तकलीफ होगी
और जितना बड़ी तकलीफ होगी
उतनी बड़ी कामयाबी होगी।
हर पतंग जानती है,
अंत में कचरे में जाना है
लेकिन उसके पहले हमें
आसमान छू कर दिखाना है।
राह संघर्ष की जो चलता है
वही संसार को बदलता है
जिसने रातों से जंग जीती
सुबह सूर्य बनकर वही चमकता है।
एक ना एक दिन हासिल,
कर ही लूंगा मंजिल,
ठोकरें ज़हर तो नहीं जो,
खा कर मर जाऊंगा।

Very nice sir thought,🥰😍😘
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