हौसलों के तर्कस पर उम्मीदों का
वह तीर जिंदा रखो
हार जाओ जिंदगी में सब कुछ मगर
फिर से वो जीतने की उम्मीद जिंदा रखो
निगाहों में मंजिल थी
गिरे और गिर कर संभलते रहे
हवाओं ने बहुत कोशिश की मगर,
चिराग आंधियों में भी जलते रहे
"हार"
तो वह सबक है
जो आपको बेहतर होने का
मौका देता है
शायद हाथों की लकीरें,
मंजिल तक ना पहुंचा पाए,
मगर आपकी मेहनत
जरूर आपका साथ निभाएगी |
आज मुश्किल है
कल थोड़ा बेहतर
बस उम्मीद मत छोड़ना
भविष्य जरूर बेहतरीन होगा
"मेहनत"
इतनी खामोशी से,
करो कि सफलता ,
शोर मचा दे
मानो तो मौज है,
वरना समस्या तो हर रोज है
सफलता का इंतजार करने से अच्छा है,
उसके लिए संघर्ष किया जाए ।
कितना भी पकड़ो
फिसलता जरूर है,
यह वक्त है साहब
बदलता जरूर है ।
अगर मेहनत आदत बन,
जाए तो कामयाबी मुकद्दर
बन जाती है ।
Very nice sir
ReplyDeleteHi
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