छाता और दिमाग तभी काम करते हैं,
जब वह खुले हो,
बंद होने पर दोनों बोझ लगते हैं।
एक ना एक दिन हासिल कर ही लूंगा मंजिल,
ठोकरें ज़हर तो नहीं जो खा कर मर जाऊंगा।
मैदान में हारा हुआ इंसान,
फिर से जी सकता है,
लेकिन मन से हारा हुआ इंसान,
कभी नहीं जीत सकता।
जो जमीन पर बैठकर क्यों आसमान देखता है,
पंखों को खोल ज़माना सिर्फ उड़ान देखता है।
जो व्यक्ति अपनी गलतियों के लिए,
खुद से लड़ता है,
उसे कोई भी हरा नहीं सकता।
कुछ अलग करना है,
तो भीड़ से हटकर चलो,
भीड़ साहस तो देती है,
पर पहचान छीन लेती है।
अभी तो इस बाज की असली उड़ान बाकी है,
अभी तो इस परिंदे का इंतिहान बाकी है,
अभी अभी मैंने लहंगा है समुंदर को,
अभी तो पूरा आसमान बाकी है।
दुनिया के सबसे ज्यादा सपने,
इस बात ने तोड़ा है कि
" लोग क्या कहेंगे "।
उठो, जागो ,बढ़ो और तब तक मत रुको,
जब तक लक्ष्य प्राप्त हो जाए।
यदि मंजिल ना मिले तो,
रास्ते बदलो क्योंकि,
वृक्ष अपनी पत्नियां बदलते हैं जड़े नहीं।
सफर में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो,
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो,
किसी के वास्ते रहा है कहां बदलती है,
तुम अपने आप को बदल सको तो चलो।
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